HINDU ओवैसी को राक्षस क्यों बताया, संविधान ना मानने वाले आतंकवादी !
HINDU मैनपुरी हिंदू सम्मेलन में बोले– संविधान न मानने वालों को ही आतंकवादी कहता हूं

HINDU मैनपुरी में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान महंत राजू दास ने कई विवादास्पद बयान दिए। उन्होंने मंच से ‘आतंकवादी’ की अपनी परिभाषा बताते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला। महंत राजू दास ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी मुस्लिम धर्म को आतंकवादी नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि उनका विरोध उन लोगों से है, जिनका संविधान से कोई लेना-देना नहीं है, जो ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ नहीं बोल सकते, खाकी वर्दी का सम्मान नहीं करते और जिस देश में रहते हैं, उसकी भावनाओं का आदर नहीं करते। ऐसे लोगों को ही वह आतंकवादी मानते हैं।
ओवैसी को ‘राक्षस’ कहे जाने के सवाल पर महंत राजू दास ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी राजनीतिक खाल पहनकर संसद भवन में भेड़िए के रूप में बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर फैसले को स्वीकार नहीं किया और कहा था कि वह अपनी औलाद को बताते रहेंगे कि यह बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। महंत राजू दास ने सवाल उठाया कि क्या संविधान की शपथ लेने वाला कोई सांसद ऐसी भाषा का प्रयोग कर सकता है।
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उन्होंने ओवैसी पर यह भी आरोप लगाया कि वह वंदे मातरम नहीं बोल सकते, हर विषय पर बयान देते हैं, लेकिन बांग्लादेश के मुद्दे पर चुप रहते हैं। इसी आधार पर उन्होंने ओवैसी को आतंकवादी करार दिया। यूजीसी से जुड़े सवाल पर महंत राजू दास ने कहा कि यह मामला कोर्ट का है और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्थगन दे दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर यूं ही नहीं बना, बल्कि इसके लिए सनातनियों ने लंबा संघर्ष किया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि फैसले के बाद भी विपक्ष के कुछ लोग राष्ट्रपति के पास जाकर इसे स्थगित कराने की मांग करने लगे और कहा कि इससे बीजेपी को राजनीतिक लाभ होगा। महंत राजू दास ने सवाल किया कि क्या राम केवल बीजेपी के हैं या सभी के हैं। महंत राजू दास ने दावा किया कि जिस तरह अयोध्या में बाबरी ढांचे को हटाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी तरह ज्ञानवापी में भी भव्य मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि यह वह डंके की चोट पर कहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मैनपुरी के पास वृंदावन है और वहां भी भव्य मंदिर का निर्माण होगा, जिसे कोई रोक नहीं सकता।
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प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़े विवाद पर बोलते हुए महंत राजू दास ने कहा कि वह संत के चोले में उन्हें प्रणाम करते हैं, लेकिन संत के चोले में राजनीति करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रयागराज में शुद्ध और स्वच्छ वातावरण में मां गंगा के तट पर यज्ञ और अनुष्ठान चल रहे थे, उसी दौरान वहां जाकर पुलिस की वर्दी फाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि यदि किसी को शिकायत थी तो उसे कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी।

इतना बड़ा धर्मगुरु यदि पुलिस की वर्दी फाड़े, तो क्या यह उचित है, यह सवाल उन्होंने उठाया। शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दिए गए बयान पर महंत राजू दास ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ पहले एक पीठ के धर्मगुरु हैं और मुख्यमंत्री बाद में। उन्होंने सवाल किया कि योगी आदित्यनाथ से हिंदू होने का प्रमाण पत्र मांगने वाले आखिर कौन होते हैं। उन्होंने कहा कि जो कोई राजनीतिक दल की गोद में खेलेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।







